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रात वहीं बितानी है। थाली साझा करनी है। असली बात सुननी है।
२० अप्रैल
यात्रा आरम्भ · २०२६
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घर छोड़ो · खजनी जोड़ो · रुख़ मोड़ो
Ghar Chhodo · Khajni Jodo · Rukh Modo
खजनी यात्रा कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं — यह ज़मीन से जुड़ने की कोशिश है। गाँव-दर-गाँव, घर-दर-घर, मैं लोगों के बीच रहूँगा और उनकी ज़िन्दगी, उनकी तकलीफ़ें और उनकी उम्मीदें समझूँगा।
अक्सर घोषणापत्र ज़मीन की सच्चाई जाने बिना लिखे जाते हैं। खजनी यात्रा इसी खाई को पाटती है — ताकि हर वादा लोगों की आवाज़ से जन्म ले।
“हर आवाज़ अहम है। हर आवाज़ सुनी जाएगी।”
यह एक वचन है — लोगों के साथ खड़े रहने का, उनके बीच रहने का, और उनकी चिंताओं को सच्चे मन से उठाने का।
रात वहीं बितानी है। थाली साझा करनी है। असली बात सुननी है।
हर बूथ की कहानी अलग। हर कहानी की ज़रूरत अलग।
घोषणापत्र आपकी आवाज़ से खुद बनेगा।
प्रत्याशी
मिट्टी का बेटा · आवाज़ का सेवक
नीचे चुनिंदा बूथ। यात्रा जहाँ-जहाँ पहुँचेगी, वहाँ की समस्याएँ घोषणापत्र में जुड़ेंगी।
प्राथमिक विद्यालय के पास खुला नाला। बरसात में घुटनों तक पानी। बच्चे भीगते हुए स्कूल जाते हैं।
स्वास्थ्य उपकेंद्र अक्सर बंद। नज़दीकी पीएचसी १४ किमी दूर। गर्भवती महिलाएँ रिक्शे से जाती हैं।
मनरेगा की बकाया मज़दूरी ६ माह से लंबित। किसान प्याज के लिए कोल्ड स्टोरेज चाहते हैं।
बिजली रोज़ ८–१० घंटे गुल। छोटी आटा चक्कियाँ एक-तिहाई आमदनी खो रही हैं।
पुराना पोखरा अब मच्छरों का घर। सितम्बर में हर साल डेंगू।
नौजवानों की माँग — सिलाई, सीएनसी, मोबाइल रिपेयर का कौशल केंद्र।
राशन की दुकान अनियमित। वृद्धावस्था पेंशन में देरी। वार्ड स्तर पर शिकायत केंद्र चाहिए।
व्यापारी चाहते हैं फुटपाथ और पार्किंग। रेहड़ी क्षेत्र। रात की रौशनी।
खजनी घोषणापत्र जीवंत रूप से लिखा जा रहा है — हर अध्याय उस गाँव से आकार लेगा जहाँ यात्रा पहुँचेगी। पहले से पकी हुई वादों की थाली नहीं — सुनते-सुनते अध्याय दर अध्याय प्रकाशित होगा।
अधिकतम ३ विकल्प चुनें। मत के बाद परिणाम दिखेंगे। एक उपकरण से एक बार मत।
आपकी बात सीधे मेरी इनबॉक्स में आएगी। कोई कमेटी नहीं। कोई छानना नहीं। कोई राजनीति नहीं।
रोज़ाना अपडेट, गाँव की कहानियाँ और घोषणापत्र के मसौदे — सीधे सड़क से।